Akshay Kumar Jha
Ranchi: राजनीति में किसी पहचना के मोहताज ना रहने वाला नाम अर्जुन मुंडा का पॉलिटिकल करियर का क्या होगा एक मजेदार बहस बन चुका है.
झारखंड में एक बार मंत्री और दो बार मुख्यमंत्री. केंद्र में आदिवासी कल्य़ाण के साथ कृषि जैसे विभाग के मंत्रालय का कामकाज संभालने वाले अर्जुन मुंडा को इस बार के लोकसभा चुनाव में कारारी हार मिली.
लोकसभा चुनव के नतीजे आने के बाद यह बहस भी चली कि बीजेपी को खूंटी से अर्जुन मुंडा को टिकट नहीं देना चाहिए था. कहा जाने लगा कि झारखंड राजनीति की समझ रखने वाले सभी को पता था कि अर्जुन मुंडा खूंटी लोकसभा से हार जाएंगे.
पिछली बार भी अर्जुन मुंडा सिर्फ 1400 वोटों से ही जीत सके थे. इस बार तो करीब ढेड़ लाख वोटों से अर्जुन मुंडा हारे. अब हार के बाद श्री मुंडा के बारे यह बात हो रही है कि अब आगे इनका क्या कदम होगा.
पार्टी अपने एक बड़े आदिवासी लीडर का इस्तेमाल आने वाले विधानसभा चुनाव में कैसे करेगी. वो भी तब जब आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बीजेपी का प्रदर्शन काफी खराब रहा है.
लोकसभा में पाचों एसटी सीट बीजेपी गंवा चुकी है.
विधानसभा चुनाव में एसटी सीट बढ़ाने की होगी जिम्मेदारी
झारखंड में सत्ता में वही काबिज होता आया है, जिसने दस से ज्यादा एसटी सीट अपने नाम की हो. बीजेपी का एसटी सीट पर पीछे होना इसके लिए सबसे ज्यादा घातक साबित हुआ है और आगे भी होगा.
लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पांचों एसटी सीटें हारी और पिछले विधानसभा चुनाव में महज दो सीट (खूंटी और तोरपा) पर ही सिमट कर रह गयी.
नतीजा सत्ता से बेदखली. अब कहा जा रहा है कि एसटी सीट पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए अर्जुन मुंडा को एक बार फिर से स्टेट पॉलिटिक्स में उतारना पड़ेगा.
बीजेपी अर्जुन को विधानसभा चुनाव में आगे करते हुई दिख रही है. उनके पुराने गढ़ खरसावा विधानसभा सीट से वो विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं. साथ ही दूसरे विधानसभी सीटों पर भी उन्हें जीत दिलाने की जिम्मेदारी मिलेगी.
विधानसभा चुनाव नतीजा ही फिक्स करेगा अर्जुन का फ्यूचर
विधानसभा चुनाव की नतीजा ही अर्जुन मुंडा का भविष्य तय करेगा. अगर बीजेपी का एसटी सीटों पर शानदार प्रदर्शन रहा, दस से ज्यादा सीटों पर पार्टी विजयी हुई. तो आने वाली झारखंड की राजनीति का दशा और दिशा बदल सकती है.
अर्जुन मुंडा की राजनीतिक कद को देखते हुए पार्टी फैसला लेगी. वहीं अगर नतीजा बीजेपी के पक्ष में नहीं आया तो शायद अर्जुन मुंडा को राजनीतिक वनवास का भी सामना करना पड़े. वैसे पार्टी चुनावी मोड में उतर चुकी है. जल्द ही यह सारी बातें, लोगों के सामने आ सकती है.