Ranchi: बाबूलाल मरांडी झारखंड के ब्यूरोक्रेसी पर लगातार हमलावर हैं. शनिवार शाम को उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर धनबाद के डीसी आईएएस आदित्य रंजन के बारे लिखा. उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि कैसे सरकार आईएएस आदित्य रंजन पर मेहरबान है. उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्यों सरकार उन्हें धनबाद डीसी के साथ आईटी निदेशक के पद भार पर भी बरकरार रखे हुए है. वहीं अब बाबूलाल ने एक ऐसे अधिकारी के बारे लिखा है जो तीन जिलों के डीएफओ के साथ दो जिले के सीएफ भी हैं. पढ़िए क्या कह रहे हैं बाबूलाल मरांडी.
माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी…
ये क्या हो रहा है… एक तरफ आठ प्रशिक्षु IFS अधिकारी वेटिंग फॉर पोस्टिंग में हैं, और एक अधिकारी पांच महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान हैं. धनबाद के डीसी आदित्य रंजन के दो पद संभालने के तर्ज पर वन विभाग में भी एक IFS अधिकारी सबा आलम अंसारी जमशेदपुर, सरायकेला और दलमा में डीएफओ एवं जमशेदपुर और चाईबासा के सीएफ जैसे पांच महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं. अंसारी तीन डीएफओ और दो सीएफ का पद अकेले संभाल रहे हैं. महत्वपूर्ण यह है कि डीएफओ के तौर पर राशि खुद खर्च कर रहे और खर्च की गई राशि का सुपरविजन सीएफ के तौर पर खुद ही कर रहे हैं… जैसे चारा घोटाले में अधिकारियों ने किया था.
2011 बैच के अधिकारी सबा आलम अंसारी द्वारा जानबूझकर प्रमोशन नहीं लिया जा रहा है, जिसके कारण सरकार द्वारा आठ प्रशिक्षु IFS अधिकारियों की पोस्टिंग लंबित रखा गया है. यह संयोग है या “ जितना बड़ा दुराचारी-उतना बड़ा अधिकारी” का एक और नमूना? क्योंकि सरकार इन्हें सिर्फ पांच पदों पर ही विराजमान नहीं रखे हुए है… बल्कि राज्य भर के वन विभाग का लगभग आधा फंड इनके अधिकार क्षेत्र में दिया.
