Ranchi: केंद्र सरकार से वित्तीय मदद नहीं मिलने और झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार किए जाने का आरोप लगाने वाले राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के दावों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक चिट्ठी ने नया सवाल खड़ा कर दिया है. गृह मंत्रालय ने झारखंड में पुलिस आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत कुछ योजनाओं को रद्द करने का फैसला लिया है. मंत्रालय ने इसके पीछे राज्य सरकार की ओर से निर्धारित समयसीमा में टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं किए जाने को वजह बताया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से झारखंड के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और राज्य के पुलिस महानिदेशक को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि निर्धारित शर्तों का पालन नहीं होने के कारण संबंधित योजनाओं की मंजूरी रद्द की जा रही है.
31 मार्च तक पूरी करनी थी खरीद प्रक्रिया
गृह मंत्रालय के पत्र के मुताबिक, 14 अगस्त 2026 को ईमेल के माध्यम से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए स्वीकृत योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति मांगी गई थी. राज्यों से प्राप्त जानकारी की समीक्षा के दौरान पाया गया कि झारखंड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ASUMP (पुलिस आधुनिकीकरण से संबंधित योजना) के तहत स्वीकृत कुछ मदों के लिए टेंडर प्रक्रिया तक शुरू नहीं की थी.
मंत्रालय ने पत्र में याद दिलाया है कि योजना की मंजूरी देते समय ही स्पष्ट कर दिया गया था कि राज्य को 31 मार्च 2026 से पहले खरीद प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बावजूद निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं की गई.
राज्य ने भी समयसीमा में खरीद को बताया था असंभव
केंद्र ने योजनाओं को रद्द करने से पहले राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया था. गृह मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को पत्र भेजकर पूछा था कि संबंधित योजनाओं की मंजूरी रद्द क्यों नहीं की जाए. इसके जवाब में झारखंड सरकार ने 18 सितंबर 2026 को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ASUMP के तहत स्वीकृत मदों की खरीद प्रक्रिया को पहले से मंजूर बजट सीमा और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना संभव नहीं है. राज्य सरकार के इस जवाब और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन योजनाओं की मंजूरी रद्द करने का निर्णय लिया, जिनके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की गई थी.
महिला पुलिस कर्मियों के लिए बनाना था शौचालय
जिस योजना को रद्द किया गया है उसके तहत पूरे राज्य भर में करीब 10 करोड़ की लागत से महिला पुलिस कर्मियों के लिए शौचालय बनाने की योजना थी. लेकिन राज्य सरकार की तरफ से केंद्र सरकार को उनकी शर्तों के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया नहीं जारी किया गया. जिसकी वजह से एक कारण बताओं नोटिस जारी करते हुए केंद्र सरकार ने पूछा कि क्यों नहीं योजना रद्द कर दी जाए. जिसके जवाब में झारखंड सरकार की तरफ से कहा गया कि केंद्र की शर्तों को मनाना संभव नहीं है. इस जवाब के बाद केंद्र सरकार ने पूरी योजना को ही रद्द कर दी.
वित्तीय मदद के दावों के बीच जवाबदेही का सवाल
केंद्र और झारखंड सरकार के बीच वित्तीय सहायता को लेकर जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह पत्र प्रशासनिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण मुद्दा सामने लाता है. एक ओर राज्य सरकार केंद्र से पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलने की बात कहती रही है, वहीं दूसरी ओर गृह मंत्रालय के पत्र में स्वीकृत राशि से जुड़ी योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन नहीं होने का उल्लेख है. सवाल यह है कि जब केंद्र से स्वीकृत राशि के उपयोग के लिए समयसीमा निर्धारित थी, तो राज्य के संबंधित विभागों ने समय पर टेंडर प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू की? इसका जवाब मिलने पर ही यह स्पष्ट होगा कि पुलिस आधुनिकीकरण की योजनाओं में देरी के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है.

