Bermo : बोकारो जिले के अत्यंत संवेदनशील और नक्सल प्रभावित जगेश्वर विहार थाना में पिछले चार महीने से स्थायी थाना प्रभारी की पदस्थापना नहीं हो पाई है. जिससे थाना क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जगेश्वर विहार थाना प्रभारी परमानंद कुमार मेहरा को हटाए जाने के बाद से थाना पिछले चार माह से स्थायी थानेदार से वंचित है. थाना प्रभारी परमानंद कुमार मेहरा को हटाए जाने के बाद स्थायी तौर पर थाना प्रभारी की पदस्थापना करने की बजाय महुआटांड़ थाना प्रभारी कृष्ण कुमार कुशवाहा को ही जगेश्वर विहार थाना का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है. जबकि वर्तमान में कई पुलिस पदाधिकारी ऐसे हैं जिनकी पदस्थापना की जा सकती थी.
थाना क्षेत्र घोर नक्सल प्रभावित
जगेश्वर विहार एवं महुआटांड़ के दोनों थानों के बीच की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है और विडंबना यह है कि दोनों ही थाना क्षेत्र घोर नक्सल प्रभावित माने जाते हैं. एक ही थाना प्रभारी के लिए दो अति-संवेदनशील थानों के प्रशासनिक, कानूनी और सुरक्षा दायित्वों को 15 किलोमीटर की दूरी तय करके प्रभावी ढंग से निभाना एक बड़ी चुनौती है. इससे न केवल कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि नक्सली तत्वों को सक्रिय होने का मौका भी मिल सकता है. सरकार ने जगेश्वर विहार और ऊपरघाट में पेंक नारायणपुर थाना का निर्माण मूल रूप से क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने और ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए किया था. ऐसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण थाने को चार महीने से स्थायी नेतृत्व न मिलना, पुलिस प्रशासन की नक्सल विरोधी रणनीति पर सवाल खड़े करता है.
लोगों का कहना मिले स्थायी थाना प्रभारी
थाना क्षेत्र के लोगों का मानना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में एक पूर्णकालिक और समर्पित थाना प्रभारी का होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि खुफिया जानकारी जुटाने, त्वरित कार्रवाई करने और जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके. पुलिस-प्रशासन को इस संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और जगेश्वर विहार थाना में जल्द से जल्द एक स्थायी एवं अनुभवी थाना प्रभारी की नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके और नक्सलवाद पर नियंत्रण बनाए रखा जा सके.
