Sanjay
Bermo: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने 1994 बैच की आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को राज्य का नया प्रभारी पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. इस नियुक्ति के साथ ही तदाशा मिश्रा झारखंड पुलिस बल की कमान संभालने वाली राज्य की पहली महिला डीजीपी बन गई हैं. पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के स्वैच्छिक त्यागपत्र के बाद, आईपीएस प्रशांत सिंह और मानविंदर सिंह भाटिया जैसे नामों की रेस में अचानक तदाशा मिश्रा का नाम आगे आना और नोटिफिकेशन जारी होना, सभी अटकलों पर विराम लगा गया. वर्तमान में वो एडीजीपी (विशेष शाखा) में सचिव के पद पर कार्यरत थीं.
तदाशा मिश्रा ने 37 नक्सलियों को कराया था सरेंडर
बोकारो की दूसरी महिला एसपी और जोनल आईजी का रिकॉर्ड-डीजीपी के पद पर पहुंचने से पूर्व भी तदाशा मिश्रा ने कई अहम पदों पर अपनी असाधारण छाप छोड़ी है. उनके नाम बोकारो की पहली महिला एसपी और पहली महिला ज़ोनल आईजी होने का गौरवपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज है. बोकारो की पहली महिला एसपी के पद पर वर्ष 2002 में तत्कालीन बाबूलाल मरांडी की सरकार ने उन्हें ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में एसपी सीआईडी के पद से बोकारो स्थानांतरित किया था, जब बोकारो के ऊपरघाट का संपूर्ण इलाका के अलावा बहुचर्चित झुमरा पहाड़, रहावन, लुगू पहाड़, नावाडीह और कसमार जैसे क्षेत्र नक्सलियों की चरम गतिविधियों का केंद्र था. एक महिला अधिकारी होते हुए भी, तदाशा मिश्रा ने अपनी निर्भीकता का परिचय बतौर एसपी के रूप में दिया था. उन्होंने नक्सलियों के गढ़ कहे जाने वाले झुमरा एवं लुगू पहाड़ पर न सिर्फ़ कई दफा पूरे सप्ताह कैंप किया, बल्कि लगातार पुलिसिया कार्रवाई और ऑपरेशन जारी रखा था. उनकी अगुवाई में पहली बार झुमरा पहाड़ से हथियार सहित भारी मात्रा में सामानों की बरामदगी की गई थी. नावाडीह प्रखंड अंतर्गत ऊपरघाट के इलाके में भी उनके लगातार अभियानों से न सिर्फ हथियार बरामद हुए, बल्कि कई नक्सलियों की गिरफ्तारी भी हुई. उनके कार्यकाल की एक बड़ी उपलब्धि यह भी रही कि बोकारो एसपी के तौर पर उनके प्रयासों से 37 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जो शांति की दिशा में एक बड़ा कदम था.
बोकारो में उनका दूसरा कार्यकाल पदोन्नति के बाद जोनल आईजी के रूप में हुआ. वह 7 नवंबर 2014 से 23 फरवरी 2016 तक इस पद पर रहीं, जिससे उन्होंने बोकारो की पहली महिला एसपी के बाद पहली महिला जोनल आईजी बनने का भी कीर्तिमान स्थापित किया. तदाशा मिश्रा को उनकी कार्यशैली के कारण ‘लेडी सिंघम’ के रूप में जाना जाता रहा है. यह नियुक्ति झारखंड पुलिस बल के इतिहास में एक मील का पत्थर है और यह राज्य की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है. उनके अनुभव और सख्त प्रशासक की छवि को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि वे राज्य में विधि-व्यवस्था और नक्सल विरोधी अभियानों को नई धार देंगी.
